जीवन में हम सीखना जब छोड़ देते हैं वहीं से हमारा जीवन बढ़ना भी छोड़ देता है।उसी दिन से हम स्थिर हो जाते हैं।सीखने की गति से ही हमारी बुद्धिमत्ता का पता चलता है और जब हम सीखना ही छोड़ देते हैं तो हमारी बुद्धि कुछ दिनों तक तो एक समानता की स्थिति में चलती है लेकिन एक समय के बाद वह स्थिर और रुक सी जाती है।धीरे धीरे उसमें गिरावट आने लगती है और एक समय के बाद उसमें मतिभ्रम और स्मृतिभ्रंश की स्थिति आ जाती है,यह हमारे जीवन को कहीं का नहीं छोड़ता है।
सीखना आपको किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ना चाहिए।भले ही आप बड़े ज्ञानी हों,जीवन के हर पहलू को सीख लिया हो जान लिया हो,विज्ञान से लेकर ज्योतिष तक को जान लिया हो,प्रत्येक विद्या के विशारद् बन गये हों।मान लीजिए आपके जीवन में सीखने के लिए कुछ भी नहीं बचा हो लेकिन कुछ न कुछ उसमें सुधार करने के लिए जरूर बचा रहता है।
विद्या विचार में हमेशा नवीनीकरण की संभावना बची ही रहती है।युग बीत जाते हैं लेकिन नये नये अनुसंधान की जरूरत इसीलिए पड़ती है क्योंकि इस जगत में कुछ भी स्थायी नहीं होता है।आज कोई कार्य किया तो वह नवीन होता है कल वही पुराना हो जाता है।यदि जीवन में नवीनता को अपनाकर रखी नहीं जाये तो जीवन से रोचकता समाप्त हो जायेगी।
सीखना आप सोच रहे होंगे कि किससे जारी रखें तो एक बच्चे के कार्यकलाप को देखें आप उससे भी नवीन ज्ञान पा सकते हैं।वह नया होता है।उसका सारा कर्म नया होता है।विचार नये,भाव नये, समझशक्ति नयी ,उसकी चपलता इतनी ज्यादा होती है कि वह किसी जवान को दौड़ में थका दे,तो वह बच्चा भी आपको नया विचार दे सकता है।मैं समझता हूं कि एक बच्चा जितना बड़ा शिक्षक हो सकता है उतना बड़ा शिक्षक एक वैज्ञानिक भी नहीं हो सकता है।
सीखना कभी नहीं छोड़ें,सीखने की कोई उम्र नहीं होती है।आप यह मानकर चलिए कि जीवन का आप अन्त उसी दिन कर लेते हैं जिस दिन से आप सीखना छोड़ देते हैं।
सीखना एक कला है, एक व्यक्ति को मैं देखता था वह जो काम मैं जानता था वह हमसे देखकर सीख लेता था बाद में वह उसी कार्य को अपने द्वारा हुआ बताता था सारा यश वह लूट ले जाता था और मैं अपने काम को अपना नहीं बता पाता था।मैं नहीं कहता कि आप उसी के जैसा बने।लेकिन सीखना न छोड़ें।
जरूरत पड़े तो आप कुत्ते से भी सीखें।जरूरत पड़े तो चींटी से भी सीखें।अब आप सोच रहे होंगे कि यह आदमी कहां चींटी और कुत्तों में ले जा रहा है।कुत्ते को आप देखेंगे कि बैठने से पहले अपनी पूंछ से जमीन को साफ करता है।सफाई की शिक्षा हम उससे क्यों नहीं ले सकते हैं?चींटी को आप देखते होंगे कि वह कभी बैठती नहीं है।आराम करते उसे कोई नहीं देखता है।तो क्या हमें उससे आलस्य त्यागने की शिक्षा नहीं लेनी चाहिए?
इसलिए पहले आप सीखने के लिए तैयार तो होवें बांकी सीखाने के लिए यहां सभी बैठे हुए हैं।
Monday, June 3, 2019
जीवन में सीखना जारी रखें।
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