Tuesday, December 24, 2019
Tuesday, December 10, 2019
जीवन सबको अवसर देता है।
जीवन में अनेक लोग अवसर की तलाश में ही लगे रह जाते हैं।यदि हमें अपने जीवन को सही अर्थ देना है और सही कर्म करना है तो हमें अपने हूनर को पहचानना पड़ेगा।हमें अपनी शिक्षा दीक्षा को जानना होगा कि हम कौन सा कर्म अच्छी तरह से कर सकते हैं।
दुनिया में सबसे बड़ी समस्या आती है लोगों को अपने कर्म की पहचान नहीं हो पाती है।वह अपनी ऊर्जा को नहीं पहचान पाता है।इससे ही सारी समस्या रहती है।
मनुष्य जब नहीं समझ पाता है कि उसे कौन सा कर्म करना चाहिए तो वह जैसे तैसे कुछ भी करने लगता है।लेकिन इस कार्य में वह अपनी ऊर्जा का सही आकलन नहीं कर पाता है।आनंद के साथ कर्म नहीं कर पाता है तो वह दुःखी रहता है।इस स्थिति में वह अपने लक्ष्य को नहीं पहचान पाता है और उस काम को उसे बीच में ही छोड़ना पड़ता है।
काम के सही नहीं चलने से निराशा जीवन में घेरने लगता है।निराशा के आने से वह अपने सही काम को फिर से नहीं कर पाता है।निराश व्यक्ति जीवन में आगे नहीं बढ़ पाता है।
एक कहानी मुझे याद आती है।एक शिष्य अपने गुरू के साथ कहीं जा रहा था।गुरू अपने शिष्य के बताये रास्तों का ही अनुसरण कर रहे थे।एक रास्ते पर तिराहे पर जाकर शिष्य ठिठक जाता है।शिष्य से गुरू पूछते हैं कि क्या हुआ ठिठक क्यों गये?शिष्य ने कहा गुरूजी ये तीनों सड़क मुझे भ्रमित कर रही है।तिराहे पर पेड़ भी एक ही समान है।गुरू ने कहा हमेसा यह ध्यान रखो कि किस रास्ते पर तुम्हें जाना है?चलो यहां हमें याद है कि जिस रास्ते पर आक का पौधा बहुत ज्यादा है उसी रास्ते पर जाना है।फिर आगे जो चौराहा है उसका ध्यान है या नहीं वहां का मुझे ध्यान नहीं है।दोनों आगे चलते जा रहे थे।जब चौराहा आया तो शिष्य फिर ठिठक गया।गुरू ने इसबार मार्गदर्शन नहीं किया।वह एक गलत रास्ते पर आगे बढ़ गया।बहुत दूर चलते चलते शिष्य जब थक गया तो पूछा गुरूजी कहीं गलत रास्ते पर तो नहीं आ गये।गुरूजी ने फिर कुछ नहीं कहा।फिर आगे चलते गये और पहुंच गये गंगा किनारे।शिष्य ने कहा गुरूजी हमलोग गलत रास्ते पर आ गये हैं।गुरू ने कहा अब यहीं स्नान ध्यान तपस्या की जायेगी।
गुरूजी को तो अभ्यास था उपवास का वह तपस्या में लीन हो गये।शिष्य को जब भूख लगी तो गुरूजी से वहां से प्रस्थान करने के लिए कहा।गुरूजी ने दण्डस्वरूप उसे और दो दिनों तक वहीं रहने के लिए कहा।
शिष्य की हालत भूखे प्यासे खराब होने लगी तो गुरूजी ने शिष्य से कहा"जब कहीं जाते हैं तो उस रास्ते को अच्छी तरह पहचानना चाहिए क्योंकि लौटना भी उसी रास्ते से है।दूसरा जहां जाना हो उसकी मंजिल कहां तक ले जायेगी यह पता होना चाहिए अन्यथा भूखे प्यासे रह जाओगे।"फिर गुरूजी शिष्य को लेकर सही रास्ते पर गये फिर भोजन पानी प्राप्त हुआ।
यह जीवन और कर्म भी इसी समान है।यदि जीवन सही रास्ते पर चलता है तो मंजिल भी मिल ही जाती है।
भगवान सभी को जीवन में सैकड़ों अवसर देते हैं।उस अवसर को पहचानना पड़ता है।वह अवसर कौन होगा कहां से आयेगा पता नहीं।हो सकता है आप ट्रेन से जा रहे हैं और किसी व्यक्ति से बात करते हैं और वह किसी काम के बारे में बताता है।वह भी अवसर ही होता है।कभी आप बैंक जाते हैं और कोई बैंकर आपको लॉन का ऑफर कर दे आपको पूंजी की आवश्यकता है।आपको वहीं पर सोचना है कि कितना लॉन लें कि आपका सारा काम हो जायेगा।
अवसर पहचानने में भूल नहीं करनी चाहिए।

