Wednesday, January 29, 2020

रोजगार की तलाश।

जीवन में अनेक लोग रोजगार की तलाश में लगे रहते हैं लेकिन उम्र बीतता रहता है ।वह अपनी रोजगार का पांव रेत की महल पर ही खड़ा करता रह जाता है।हमें यदि सही में रोजगार की तलाश रहती है तो हमें कुछ ऐसा करना होगा जिससे रोजगार सही में मिल सके।मिलने के बाद वह स्थायी बनकर रह भी सके।
  यदि हमें स्थायी रोजगार की तलाश रहती है तो जीवन में बहुत कम रोजगार हैं जो आपको स्थायीत्व के साथ मिलता है।स्थायीत्व से मिलने वाला रोजगार का क्षेत्र कम ही है।इसके लिए पहले दो विशेष बिन्दुओं पर बात कर लें-
१) सरकारी नौकरी
२)व्यापार
१)सरकारी नौकरी-लोग यदि स्थायी नौकरी की तलाश करते हैं तो उनके लिए सबसे अच्छा सेक्टर होता है गवर्नमेंट जॉब।लेकिन सरकारी नौकरी उतना आसान भी नहीं है।इसके लिए सबसे आवश्यक होता है आपकी शिक्षा दीक्षा।अधिकांश लोग शिक्षित ही नहीं होते हैं तो उन्हें प्रथम बिन्दु में ही नौकरी का भरोसा छोड़ देना होता है।दूसरा वर्ग आता है जो न्यूनतम पढ़ाई कर चुका है।जैसे १०वीं या १२वीं साथ में जैसे आई टी आई किया हुआ है।आई टी आई वालों को भी जॉब मिल जाता है क्योंकि यह पूरी तरह से स्किल्ड हो चुके होते हैं।
दूसरा वर्ग वह आता है जो १०वीं भी नहीं किया है।९वीं कर रखा है।अब इनके पास समस्या आती है कि वे करें तो क्या करें।आज के परिदृश्य में आपके लिए एक ही रास्ता बचता है स्किल्ड इंडिया का ।यहां जाकर हूनर या स्किल सीखें और वहीं से आपको कोई काम मिल जायेगा।
  इसमें भी एक वर्ग आता है जो ९वीं तक की भी पढ़ाई नहीं की है।वह क्या करेगा?ऐसे जो व्यक्ति हैं उनके लिए दो या तीन नौकरी के रास्ते बचते हैं।जिनमें पहला रास्ता है मनरेगा मजदूर की तरह जिला कार्यालय में जाकर अपना पंजीकरण करवायें।१०० दिन की रोजगार योजना में उन्हें अवश्य बुलाया जायेगा।सरकारी मानदेय उन्हें अवश्य मिल जायेगा।
इसके अतिरिक्त जो विशेष रोजगार आती हैं और आगामी समय में बहुतायत से आनेवाली है वह है रेलवे बैंकिंग टीचिंग पी डबल्यूडी स्किल्ड स्वच्छता सेना सुरक्षा और पुलिस में।यह बहाली ३-५ महीनों के भीतर लगभग १० लाख बहाली राज्य और केन्द्र सरकार में आनेवाली हैं।२ लाख के आसपास तो केवल केन्द्र सरकार निकालने वाली हैं।इन नौकरियों की विशेषता होती है लगभग बीए बीटेक बीएड एम ए एम एड एमटेक होना आवश्यक होता है।लेकिन इसमें जो शिक्षित लोग हैं उसे भी एक व्यापक प्रतियोगिता के बाद ही इसमें स्थान मिल पायेगा।इन तीन केटेगरी में फिट रहनेवाले लोगों को काम और रोजगार मिल जाता है लेकिन जो इन वर्गों में भी अनफिट हैं उन्हें क्या करना होगा?
२)व्यापार व्यवसाय-जो लोग सरकारी नौकरी नहीं पाते हैं और स्थायी जॉब की तलाश करना चाहते हैं तो उन्हें क्या करना होगा?उनके लिए व्यापार ही एकमात्र साधन बचता है।अब जो व्यापार करना चाहते हैं उनके लिए अनेक समस्या है।सबसे पहले व्यापार कौन सा करें? पैसे कहां से लायें?दोस्तों व्यापार यदि करना चाहते हैं तो आप अपना हूनर अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन स्वयं करें।जैस आप समझें कि आपको किस क्षेत्र की जानकारी कितनी है?धन कहां से लायेंगे? किस किस स्थान को आप बेहतर जानते है?क्योंकि व्यापार में एक सबसे बड़ी समस्या आयेगी स्थान चयन की जिन स्थानों को आप नहीं जानते हैं उन स्थानों पर आप अवश्य ही कोई कार्य नहीं कर पायेंगे।
  आजकल बहुत लोग एफिलिएट मार्केट की ओर अपना मुख करते हैं लेकिन वह पूर्ण और सही व्यापार नहीं है वह पूरीतरह से स्थायी रोजगार से आपको नहीं जोड़ता है।
  स्थायी कोई प्रोडक्ट निर्माण या कोई एजेंसी या किसी गुड जैसे पुस्तक पेन या अन्य थौक और खुदरा व्यापार कर आप आपूर्ति कर सकते हैं।बिजली का सामान मोबाईल रिचार्ज मोबाईल रिपेयरिंग की दुकान खोल सकते हैं।
  अन्य कम पूंजी में स्थायी दुकान करने वालों को जो दुकान खोलना चाहते हैं वे अपने मोहल्ले समाज के इर्द गिर्द अपना दुकान खोलें।दूसरा उन्हें पूंजी की कमी हो सकती है।इसके लिए मुद्रा लॉन योजना या बैंक से कम ब्याज पर पैसा लेकर अपना कार्य करना चाहिए।दूसरा बैंको के द्वारा एक ग्रूप के तहत लॉन दिया जाता है उसमें कम इन्टरेस्ट पर लॉन रहता है वह लेकर काम कर सकते हैं।इसके अतिरिक्त सरकार ने अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति जनजाति के लिए ब्याजमुक्त लॉन की व्यवस्था की है जिसका आप सबों को लाभ उठाना चाहिए।
     नौकरी रोजगार लॉन जीवन से संबंधित अन्य कोई जानकारी और चाहिए तो अपना सवाल कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।आपके सभी सवालों का जवाब दिया जायेगा।https://youtu.be/3n4mDBEj JYg

Tuesday, December 10, 2019

जीवन सबको अवसर देता है।

जीवन में अनेक लोग अवसर की तलाश में ही लगे रह जाते हैं।यदि हमें अपने जीवन को सही अर्थ देना है और सही कर्म करना है तो हमें अपने हूनर को पहचानना पड़ेगा।हमें अपनी शिक्षा दीक्षा को जानना होगा कि हम कौन सा कर्म अच्छी तरह से कर सकते हैं।
    दुनिया में सबसे बड़ी समस्या आती है लोगों को अपने कर्म की पहचान नहीं हो पाती है।वह अपनी ऊर्जा को नहीं पहचान पाता है।इससे ही सारी समस्या रहती है।
मनुष्य जब नहीं समझ पाता है कि उसे कौन सा कर्म करना चाहिए तो वह जैसे तैसे कुछ भी करने लगता है।लेकिन इस कार्य में वह अपनी ऊर्जा का सही आकलन नहीं कर पाता है।आनंद के साथ कर्म नहीं कर पाता है तो वह दुःखी रहता है।इस स्थिति में वह अपने लक्ष्य को नहीं पहचान पाता है और उस काम को उसे बीच में ही छोड़ना पड़ता है।
काम के सही नहीं चलने से निराशा जीवन में घेरने लगता है।निराशा के आने से वह अपने सही काम को फिर से नहीं कर पाता है।निराश व्यक्ति जीवन में आगे नहीं बढ़ पाता है।
   एक कहानी मुझे याद आती है।एक शिष्य अपने गुरू के साथ कहीं जा रहा था।गुरू अपने शिष्य के बताये रास्तों का ही अनुसरण कर रहे थे।एक रास्ते पर तिराहे पर जाकर शिष्य ठिठक जाता है।शिष्य से गुरू पूछते हैं कि क्या हुआ ठिठक क्यों गये?शिष्य ने कहा गुरूजी ये तीनों सड़क मुझे भ्रमित कर रही है।तिराहे पर पेड़ भी एक ही समान है।गुरू ने कहा हमेसा यह ध्यान रखो कि किस रास्ते पर तुम्हें जाना है?चलो यहां हमें याद है कि जिस रास्ते पर आक का पौधा बहुत ज्यादा है उसी रास्ते पर जाना है।फिर आगे जो चौराहा है उसका ध्यान है या नहीं वहां का मुझे ध्यान नहीं है।दोनों आगे चलते जा रहे थे।जब चौराहा आया तो शिष्य फिर ठिठक गया।गुरू ने इसबार मार्गदर्शन नहीं किया।वह एक गलत रास्ते पर आगे बढ़ गया।बहुत दूर चलते चलते शिष्य जब थक गया तो पूछा गुरूजी कहीं गलत रास्ते पर तो नहीं आ गये।गुरूजी ने फिर कुछ नहीं कहा।फिर आगे चलते गये और पहुंच गये गंगा किनारे।शिष्य ने कहा गुरूजी हमलोग गलत रास्ते पर आ गये हैं।गुरू ने कहा अब यहीं स्नान ध्यान तपस्या की जायेगी।
     गुरूजी को तो अभ्यास था उपवास का वह तपस्या में लीन हो गये।शिष्य को जब भूख लगी तो गुरूजी से वहां से प्रस्थान करने के लिए कहा।गुरूजी ने दण्डस्वरूप उसे और दो दिनों तक वहीं रहने के लिए कहा।
   शिष्य की हालत भूखे प्यासे खराब होने लगी तो गुरूजी ने शिष्य से कहा"जब कहीं जाते हैं तो उस रास्ते को अच्छी तरह पहचानना चाहिए क्योंकि लौटना भी उसी रास्ते से है।दूसरा जहां जाना हो उसकी मंजिल कहां तक ले जायेगी यह पता होना चाहिए अन्यथा भूखे प्यासे रह जाओगे।"फिर गुरूजी शिष्य को लेकर सही रास्ते पर गये फिर भोजन पानी प्राप्त हुआ।
   यह जीवन और कर्म भी इसी समान है।यदि जीवन सही रास्ते पर चलता है तो मंजिल भी मिल ही जाती है।
   भगवान सभी को जीवन में सैकड़ों अवसर देते हैं।उस अवसर को पहचानना पड़ता है।वह अवसर कौन होगा कहां से आयेगा पता नहीं।हो सकता है आप ट्रेन से जा रहे हैं और किसी व्यक्ति से बात करते हैं और वह किसी काम के बारे में बताता है।वह भी अवसर ही होता है।कभी आप बैंक जाते हैं और कोई बैंकर आपको लॉन का ऑफर कर दे आपको पूंजी की आवश्यकता है।आपको वहीं पर सोचना है कि कितना लॉन लें कि आपका सारा काम हो जायेगा।
   अवसर पहचानने में भूल नहीं करनी चाहिए।

Monday, December 9, 2019

जीवन जीने की ललक

दुनिया में कौन ऐसा है जो अपना जीवन नहींं जीना चाहेगा? यदि आप किसी की जिजीविषा को समझना चाहते हैं तो एक वृद्ध से मिलें जो मृत्यु की शय्या पर लेटा है उसे पता है कि वह ज्यादा दिन तक दुनिया में जीवित नहीं रहनेवाला है।लेकिन वह मरना नहीं चाहता है।वह और थोड़ा और थोड़ा जी लेना चाहता है।
   एक कहानी मुझे याद आती है।एक साधू थे वह भगवान से वरदान पाये थे कि तुम्हें अंतिम के दस वर्ष दिये जाते हैं जिसमें तुम जितना चाहो ऐश मौज से अपना जीवन जी सकते हो।लेकिन मृत्यु से छह माह पूर्व मैं आऊंगा तुम्हें सचेत कर जाऊंगा तुम अपना सभी काम निपटा लेना। मृत्यु से एक दिन पूर्व आऊंगा और तुम्हें एक चेतावनी दे जाऊंगा और तुम्हें खुशी खुशी उस आसन पर बैठना है जिसपर बैठकर तुम्हें स्वर्ग की ओर प्रस्थान करना है।लेकिन यदि तुम उस आसन पर बैठा नहीं मिलेगा और खुशी खुशी जाने को तैयार नहीं मिलेगा तो मैं लौट जाउंगा।उस साधू ने सभी बातों में हां में हां मिला दी।
   वह साधू बड़े ही सुखपूर्वक अपना जीवन जीने लगा।परिवार बन गया ।बेटे बेटियां सब आ गई।दस वर्ष कैसे बीता पता ही नहीं चला।तय समय पर भगवान आये चेतावनी देकर चले गये।छह माह का समय बीत गया।मृत्यु से एक दिन पूर्व भगवान फिर आये ।साधू से कहा हम इस समय आयेंगे तुम उस आसन पर बैठा मिलना।अब साधू सोच में पड़ गया।अभी तो बच्चों की पढ़ाई नहीं हुई है।बेटी की शादी हो जाती तो अच्छा होता।अभी तो हमने जीवन का आनंद भी नहीं लिया है।
   तय समय में भगवान आये लेकिन आसन खाली देखा।फिर सूक्ष्म रूप में भगवन ने साधू को एक विस्तर पर लेटा देखा वह भी चिन्तित ।भगवान वायदे के अनुसार लौट गये ।फिर एक वर्ष तक लौटकर नहीं आये।साधू एक वर्ष तक मृत्यु के भय से विस्तर पर ही लेटा रहा।फिर एक वर्ष बीत गया।फिर वही हालत।इसप्रकार दस वर्ष और बीत गये।
  दसवें साल तक साधू की हालत दयनीय हो गई थी।भगवान ने कहा कि क्यों और कितने शरीर को त्रस्त करोगे?तुम जब मोह माया सबका त्याग कर चुके थे तभी ही तुम अच्छे थे।हमने शायद इस माया के जंजाल में फंसाकर तुममें संसार के प्रति मोह जागृत कर दिया है।यदि तुम आज हमारे साथ नहीं चलते हो तो मैं फिर यहां नहीं आऊंगा और  तुम्हें ले जाने के लिए यम ही आएंगे। आज तुम्हारा अंतिम दिन है।
   साधू ने सोचा कि भगवान सही कह रहे हैं मैं डरकर जी रहा हूं।मृत्यु मेरे करीब है लेकिन मैं जा नहीं रहा हूं।यह जीना तो कोई जीना नहीं है।शरीर में थोड़ी सी भी ताकत नहीं बची है।अब चलने में ही लाभ है।अंतिम समय में रोते बिलखते वह जाने लगे।घर के सभी लोग उनकी वीमारी से परेशान होकर मृत्यु की ही कामना करने लगे थे।
   यही है जीवन का आलाप। जिसका मोह किसी का साथ नहीं छोड़ता है।वह बड़ा से बड़ा ज्ञानी ही क्यों न हो।लेकिन मोह से बंधकर हम जीवन में जितना भी कुछ भी कर लें।लेकिन जब जीवन से जाने का समय आता है तो सबको जाना ही होता है।

Thursday, November 7, 2019

ऊषा कीलप्रथम किरण

ऊषा की पहली किरण जब हमारे ऊपर पड़ती है हमारा कण कण खिल खिला उठता है।भोर हो जाने का आभास होता है।प्रकृति का नियम कितना कड़ा है एक मिनट का विलम्ब सूर्य देव को पसन्द नहीं है।हो भी क्यों नहीं ।वह जब स्वयं विलम्ब नहीं करते हैं तो दूसरे से भी तो यही अपेक्षा रखेंगे।
   सूर्यदेव का सबसे बड़ा अनुकरण करती हैं नदियां।नदियां सूर्य की लालिमा से सराबोर वह हिलोरें भरने लगती हैं।कल कल करती धारायें अपनी गति से आगे बढ़ने लगती हैं।इतराती मुस्काती वह आगे बढ़ने लगती हैं।समुद्र उसकी मंजिल होती हैं।जैसे वह किसी कवि की कल्पना हो।समुद्र जैसे नदी को बुला रहा हो-
         आओ पिय तुम मिल जाओ
             बांहो में मेरे तुम भर जाओ
               गलबहियां खाती तुम मुस्काओ
                  पिया पिय का मिलन करवा जाओ'
नदियों की धाराएं समुद्र से मिलने के लिए बढ़ जाती है।समुद्र अपनी दोनों बांहों में भर लेना चाहता है।समुद्र भी हर्षित है प्रफुल्लित है।नदियां मटरा मटरा कर चलती हैं लेकिन समुद्र उतावला हो रहा है नदी को अपनी बाहों में भर लेने के लिए।लेकिन नदियां इतराती बलखाती बढ़ती हैं।उसे कोई जल्दी बाजी नहीं है।
  चिड़ियों का दल नदी के किनारे जलपान करने आती हैं।वह जैसे नदी की सारी कारगुजारियों को समझ रहा हो।चिड़ियों का जागना भी समय से हो जाता है।चिड़ियों का भी दो स्थल नित्य का जाना रहता है।एक नदी किनारे तक दूसरा आकाश की ऊंचाई तक।नदी में जल पीने के पश्चात वह आकाश में अठ खेलियां खेलने लगते हैं।प्रात:काल में जैसे आकाश में वह अपना व्यायाम कर रहा हो।आकाश इन जीवों को कहता है-
      आओ हे नरजीव चराचर
         गाओ हे गीत धराधर
           हर्षित हो तुम जीव धरती पर
             देखो हुआ अब भोर पूर्व धरापर
यह कवि कल्पना कर सकता है।लेकिन कुछ जीव हैं जिसका आलस्य उसका साथ नहीं छोड़ता है।वह विस्तर छोड़ना ही नहीं चाहता है।
   हम प्रकृति के जितने करीब होते हैं उतने ही स्वस्थ होते हैं-
उठ जाग जाग अब भाग भाग
     अलस न करे ताग ताग
       लग जाये न कहीं दाग दाग
       छोड़ो भगाओ रोगराग।
       यही जीवन है जब सूर्य हम सबों को जगाने आता है।
      

Friday, September 27, 2019

Jeevandarshan

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Monday, June 3, 2019

जीवन में सीखना जारी रखें।

जीवन में हम सीखना जब छोड़ देते हैं वहीं से हमारा जीवन बढ़ना भी छोड़ देता है।उसी दिन से हम स्थिर हो जाते हैं।सीखने की गति से ही हमारी बुद्धिमत्ता का पता चलता है और जब हम सीखना ही छोड़ देते हैं तो हमारी बुद्धि कुछ दिनों तक तो एक समानता की स्थिति में चलती है लेकिन एक समय के बाद वह स्थिर और रुक सी जाती है।धीरे धीरे उसमें गिरावट आने लगती है और एक समय के बाद उसमें मतिभ्रम और स्मृतिभ्रंश की स्थिति आ जाती है,यह हमारे जीवन को कहीं का नहीं छोड़ता है।
         सीखना आपको किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ना चाहिए।भले ही आप बड़े ज्ञानी हों,जीवन के हर पहलू को सीख लिया हो जान लिया हो,विज्ञान से लेकर ज्योतिष तक को जान लिया हो,प्रत्येक विद्या के विशारद् बन गये हों।मान लीजिए आपके जीवन में सीखने के लिए कुछ भी नहीं बचा हो लेकिन कुछ न कुछ उसमें सुधार करने के लिए जरूर बचा रहता है।
       विद्या विचार में हमेशा नवीनीकरण की संभावना बची ही रहती है।युग बीत जाते हैं लेकिन नये नये अनुसंधान की जरूरत इसीलिए पड़ती है क्योंकि इस जगत में कुछ भी स्थायी नहीं होता है।आज कोई कार्य किया तो वह नवीन होता है कल वही पुराना हो जाता है।यदि जीवन में नवीनता को अपनाकर रखी नहीं जाये तो जीवन से रोचकता समाप्त हो जायेगी।
       सीखना आप सोच रहे होंगे कि किससे जारी रखें तो एक बच्चे के कार्यकलाप को देखें आप उससे भी नवीन ज्ञान पा सकते हैं।वह नया होता है।उसका सारा कर्म नया होता है।विचार नये,भाव नये, समझशक्ति नयी ,उसकी चपलता इतनी ज्यादा होती है कि वह किसी जवान को दौड़ में थका दे,तो वह बच्चा भी आपको नया विचार दे सकता है।मैं समझता हूं कि एक बच्चा जितना बड़ा शिक्षक हो सकता है उतना बड़ा शिक्षक एक वैज्ञानिक भी नहीं हो सकता है।
       सीखना कभी नहीं छोड़ें,सीखने की कोई उम्र नहीं होती है।आप यह मानकर चलिए कि जीवन का आप अन्त उसी दिन कर लेते हैं जिस दिन से आप सीखना छोड़ देते हैं।
      सीखना एक कला है, एक व्यक्ति को मैं देखता था वह जो काम मैं जानता था वह हमसे देखकर सीख लेता था बाद में वह उसी कार्य को अपने द्वारा हुआ बताता था सारा यश वह लूट ले जाता था और मैं अपने काम को अपना नहीं बता पाता था।मैं नहीं कहता कि आप उसी के जैसा बने।लेकिन सीखना न छोड़ें।
       जरूरत पड़े तो आप कुत्ते से भी सीखें।जरूरत पड़े तो चींटी से भी सीखें।अब आप सोच रहे होंगे कि यह आदमी कहां चींटी और कुत्तों में ले जा रहा है।कुत्ते को आप देखेंगे कि बैठने से पहले अपनी पूंछ से जमीन को साफ करता है।सफाई की शिक्षा हम उससे क्यों नहीं ले सकते हैं?चींटी को आप देखते होंगे कि वह कभी बैठती नहीं है।आराम करते उसे कोई नहीं देखता है।तो क्या हमें उससे आलस्य त्यागने की शिक्षा नहीं लेनी चाहिए?
        इसलिए पहले आप सीखने के लिए तैयार तो होवें बांकी सीखाने के लिए यहां सभी बैठे हुए हैं।